महिला नागा साधुओं के ये 7 रहस्य जानकार चौंक जाएंगे आप, पुरुष साधुओं से अलग होती है ये बात

अमूमन हम सभी यही मानते हैं कि केवल पुरुष ही नागा साधु बनते हैं। लेकिन, आपको जानकर शायद थोड़ी हैरानी हो कि महिलाएं भी नागा साधु बनती हैं। दरअसल, इस बात की चर्चा इसलिए जोरों पर है क्योंकि इस बार कुंभ मेले में महिला नागा साधु भी शामिल हो रही हैं। इसलिए आज हम आपको महिला नागा साधुओं की उस रहस्यमयी दुनिया के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि महिला नागा साधुओं की दुनिया किस तरह से पुरुष महिला साधुओं के जैसी ही होती हैं। तो आइय़े देखते हैं कितनी रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया।

महिला नागा साधु बनने से पहले महिलाओं को 10 से 10 साल तक पूर्ण ब्रह्मचार्य का पालन करना अति आवश्यक है। इसके बाद इस बात का निर्यण लिया जाता है कि वो महिला ब्रह्मचार्य का पालन कर रही है और उसे नागा साधु बनाया जा सकता है। इस बात का निर्णय महिला नागा साधुओं की गुरु करती हैं।

महिला का नागा सन्यासन बनाने से पहले मुंडन किया जाता है। इसके अलावा, उसकी पूरी सम्पर्णता सुनिश्चित करने के लिए उसे यह साबित करना होता है कि वह अपने परिवार से दूर हो चुकी है और अब किसी भी बात का मोह नही है।

सन्यासन बनने से पहले अखाड़े के साधु-संत उस महिला के घर परिवार की जांच करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि कुंभ में नागा साधुओं के साथ महिला सन्यासन भी शाही स्नान करती हैं। नागा सन्यासन को अखाड़े के सभी साधू और संत माता कहते हैं और पुरा सम्मान करते हैं।

लेकिन, पुरुष नागा साधू और महिला नागा सन्यासन के बीच फर्क सिर्फ कपड़ों का होता है। एक तरफ जहां पुरुष नागा साधू पीला वस्त्र पहनते हैं और इसे पहनकर ही स्नान करते हैं। तो वहीं महिला नागा सन्यासनें नग्न स्नान नहीं करती हैं।

महिला नागा सन्यासन को सन्यासन बनने से पहले स्वंय का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है यानि वो खुद को मृत मान लेती हैं।


महिला नागा सन्यासन पूरे दिन भगवान का स्मरण करती रहती हैं। वो शिवजी का जप करती हैं और सिर्फ भोजन के वक्त ही थोड़ा बहुत आराम करती हैं।

आपको बता दें कि साल 2013 महाकुंभ के दौरान महिला नागा सन्यासियों को स्नान और अखाड़े बनाने के लिए अलग से जगह दी गई थी, जिसके बाद उन्हें अब हर बार कुंभ में शामिल होने की अनुमति मिल चुकी है। हालांकि, इसका विरोध भी हुआ था, लेकिन यह विरोध ज्यादा दिनों तक न चल सका।

 

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